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फिर से एक शहर कहीं बसाया जाये Top
फिर से एक शहर कहीं बसाया जाये
जिसमे रोते हुये लोगो को हंसाया जाये॥

बेरूखी तुझसे मिली और रूसवाईयां भी
फिर भी तेरे कूचे से वापिस न अब आया जाये॥

मैने जलाया है इक चिराग तेरी मुहब्बत का
वो जालिम सोचता है कैसे इसे बुझाया जाये॥

गहरी नींद में सो गया मैं तेरे तसव्वुर में
मैं नहीं चाहता कि अब मुझको जगाया जाये॥

कतरा कतरा मेरे इश्क का है गम में डूबा हुआ
दौलते गम को न बेवजह बहाया जाये॥

कातिले वार सहे मैंने फिर भी जिन्दा
रहा वो परेशां है अब कैसे मुझे सताया जाये॥


फना Top
दोस्त मिट गया हूं फना हो गया हूं मैं
अब कुछ भी नहीं मुझमें हवा हो गया हूं मैं॥

हिम्मत बुलन्द करने से भी कुछ न बन सका
अपने ही गम की खुद दवा हो गया हूं मैं॥

एक बात न सह सकेंगे तेरी वो सुनील
बेवजह ही यूं उनसे खफा हो फया हूं मैं॥


तन्हाई Top
इस कदर तन्हा हूं अपने गमें वहशत में
अब मेरे साये भी मुझ पर हंसा करते हैं॥

मेरी हालत ही कुछ ऐसी है तेरे गम में
मुझको सब लोग दीवाना कहा करते हैं॥

तेरी आंखों से कभी जाम पिया था मैंने
अब तो हर वक्त हम प्यासे रहा करते हैं॥

तुम भुला दो मुझे ये मर्जी तुम्हारी है गर
तेरी यादों से ही दिल रोशन किया करते हैं॥


यादों के दिये Top
जब भी यादों के दिये जलाये हैं
तेरे अफसाने याद आये हैं॥

लाख चाहा के भूल जायें तुम्हे
ख्वाबों को भी ना भूल पायें हैं॥

रोशनी से तो हम गुजर ना सके
बस अंधेरे ही रास आये हैं

शायद अब यूं ही हम भटकते रहें
रास्ते अपनों ने जो दिखाये हैं॥

जिसको भी हमने अपना मान लिया
उसने ही मुझपे सितम छाये हैं॥

दिल बहुत चाहता है सच बोले
झूठ मजबूरी ने बुलवाये हैं॥


अहसास Top
मौत कल रात फिर जगाने लगी मुझको
एक तन्हा सी वीरानी चार सूं छाने लगी॥

चला गया था जो इक दिन बागे दिल उजाड़ कर
फिर उसी जालिम की याद बारहा आने लगी है

उनके आने का एहसास यूं होने लगा
धड़कनों की एक आहट सी मुझे आने लगी॥

इस कदर शर्मोंहया से देखना उनका मुझे
इन अन्धेरों पर भी जैसे रोशनी छाने लगी॥

आइना क्यूं आज मुझसे पूछता है इक ही सवाल
कि मेरी सूरत से उसको शर्म है आने लगी॥


आग यादों में लगा गया कोई Top
आग यादों में लगा गया कोई
जख्मों को फिर से दुखा गया कोई!!

जब अन्धेरों मे भटकना चाहा
एक शमा जला गया कोई!!

मुझसे न हो सकी खता कोई
क्यों मुझे बद्दुआ दे गया कोई!!

बाद मुद्दत के मुझे होश आया
तेरी तस्वीर दिखा गया कोई!!


फिर तेरे ख्याल से Top
फिर तेरे ही ख्याल से बेताब है ये दिल
खता हुई भूलने की गुनहगार है ये दिल!!

अपनो ने दिले यार को तो खाक कर दिया
गैरों का आज फिर से तलबगार है ये दिल!!

यूं ही हरेक शख्स पर मैं करता रहा यकीं
अपने ही आप खुद से परेंशा है ये दिल !!

चलता रहा है मैं जिंदगी से खुद जुदा जुदा
जब जिन्दगी मिली तो बेजार है ये दिल


जख्में दिल Top
आप बस यूं ही मुस्कुराते रहिये
दिल पे मेरे जख्म लगाते रहिये!!

सुना है कल शब भी बड़ी रौशन थी
महफिल बस यूं ही सजाते रहिये!!

दिले सकूं मिलता है अगर
मुझको यूं ही तड़पाते रहिये!!


तू मुझसे दुआऐं ले जा Top
ए हवा तेज़ चल और मुझको उड़ाकर लेजा
कूचाए यार से तू मुझको छुआ कर ले जा!!

गर ना मिलना है जिन्दगी में जो मुझसे कभी
मेरी तस्वीर को आंखो में बसा कर ले जा!!

इक समंदर है मेरी आंखों में तेरी यादों का
तुझसे मुमकिन हो तो इसे बहाकर ले जा!!

तूने ही दर्द दिया है दिल के जख्मों को
बदले में इसके भी तू मेरी दुआएं ले जा!!


यूं महसूस हो रहा जैसे Top
यूं महसूस हो रहा जैसे

उठा है फिर कोई तूफान यादों के समन्दर में
मिटाना चाहती हैं लहरें मेरे वजूद को
मगर नाकाम हैं अपने इरादों में
ये सोचकर क्या हासिल होगा मिटाकर मुझे
कोई रोएगा ही नहीं मेरे जाने के बाद
क्यूंकि मर गया हूं बहुत पहले ही मै

यू महसूस हो रहा जैसे

बन चुका है खंडहर मेरी ख्वाहिशों का महल
हर पत्थर लगा रहा है मेरी मजबूरी पर ठहाका
खामोशियों का शोर जैसे खा जाना चाहता है मुझको
अहसास कराना चाहता है हकीकत का जैसे
ओढ़ कर झूठी हसरतों का कफन भाग रहा हूं खुद से
मेरी परछाई भी अब मुझ पर हंसने लगी है

यू महसूस हो रहा जैसे


वो कैसा शख्स था Top
बुजदिल कहें नाकाम कहें क्या कहें उसको
जालिम के सामने जो खड़ा था हाथ जोड़कर

बहरूपिया था वो न जाने कैसा शख्स था
रो रहा था जो हंसी का लिबास ओढ़ कर

शिकवे गिलों से शायद उसको परहेज़ था
सरे राह जो बेअहसास हुआ एतबार तोड़कर


तन्हाई की स्याही Top
मुझको तन्हाई की स्याही में डुबोने वाले
तेरी यादों के समंदर में उतर जाउंगा

कोई समंदर भी क्या मुझे डुबोएगा
वो ज़ज़ीरा हूं के फिर से उभर जाउंगा

नाकामियों का सिला मुझको दिलाने वाले
तेरा चेहरा तो नहीं कि फिर से संवर जाउंगा

वक्त रहते ही तुम प्यार से पुकारों मुझको
बिछड़ के तुझसे न जाने मै किधर जाउंगा

शाक से टूटने वाला मैं वो पत्ता हूं
छू लिया गर तो पलभर में बिखर जाउंगा